मेरी बात:


आयो कहॉं से घनश्‍याम

प्रशंसक

सोमवार, 22 मार्च 2010

हुस्नवाले हुस्न का अंजाम देख.

हुस्न वाले हुस्न का अंजाम देख।
तेरी गलियों में मचा कोहराम देख।
तुझ पे लट्टू हैं जवां दिल ही नहीं,
हो रहे बूढ़े भी सब गुलफाम देख।
हर कोई बेकल तेरे दीदार को,
तेरी खातिर होते क़त्ल-ऐ-आम देख।
है जवानी जब तलक कायम तेरी,
तब तलक दुनिया को तुझसे काम देख।
हुस्न तेरा एक दिन ढल जाएगा,
होगा तू गुमनाम और बेदाम देख।

- घनश्याम मौर्य

कोई टिप्पणी नहीं: