मेरी बात:


आयो कहॉं से घनश्‍याम

प्रशंसक

सोमवार, 5 अप्रैल 2010

हमने आँगन में दाने डाले हैं.

हमने आँगन में दाने डाले हैं।
कबूतर आकर खाने वाले हैं।

भोर की लाली छा गयी देखो
पंछी अब चहचहाने वाले हैं।

मस्जिदों में अज़ान , मंदिरों में
घंटे अब टनटनाने वाले हैं।

न्यूज़ चैनल पे आज फिर कोई,
खबर बुरी दिखाने वाले हैं।

आज तो घूमने जाना था मगर,
घर में मेहमान आने वाले हैं।


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