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आयो कहॉं से घनश्‍याम

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गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

वारिस

एक बार मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल में एक नि:संतान व्‍यापारी के मरने पर उसकी सारी सम्‍पदा सरकार ने जब्‍त कर ली। एक महिला, जो स्‍वर्गीय व्‍यापारी की चचेरी बहन होने का दावा करती थी, बादशाह के पास पहुँची और बोली कि वह सम्‍पदा उसको मिलनी चाहिए। बादशाह ने उत्‍तर दिया, ''तुम्‍हारा उस सम्‍पदा पर कोई हक नहीं बनता। तुम उसकी सगी बहन तो हो नहीं।'' इस पर महिला ने प्रत्‍युत्‍तर दिया, ''जहॉंपनाह, यह सच है कि मैं उसकी सगी बहन नहीं हूँ, बल्कि चचेरी बहन हूँ। लेकिन आपका उससे क्‍या रिश्‍ता था जो आप उसकी दौलत पर अपना हक जताते हैं?'' बादशाह इस उत्‍तर से प्रसन्‍न हुआ। उसने तुरन्‍त हुक्‍म दिया कि व्‍यापारी की सारी सम्‍पत्ति उस महिला को सौंप दी जाये और यह भी हुक्‍म दिया कि भविष्‍य में किसी के मरने पर सरकार द्वारा उसकी सम्‍पत्ति तब तक न जब्‍त की जाये जब तक उसका मालिक बिना किसी वारिस के न मरा हो।

1 टिप्पणी:

kshama ने कहा…

Baat to bilkul sahee hai!