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आयो कहॉं से घनश्‍याम

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मंगलवार, 10 मई 2011

सत्‍य वचन

एक बार की बात है। एक राज्‍य का राजा बहुत बूढ़ा हो गया था। उसका पुत्र अभी छोटा ही था इसलिए राजा उसके लिए एक योग्‍य मंत्री की तलाश में था। एक दिन उसने अपने सभी दरबारियों को बुलाया। उसने बारी-बारी से सभी दरबारियों से एक ही प्रश्‍न किया, ''क्‍या मैं एक अच्‍छा राजा हूँ?'' किसी दरबारी ने कहा, ''महाराज, आप एक आदर्श राजा हैं।'' दूसरे दरबारी ने कहा, ''आप संसार के सबसे अच्‍छे राजा हैं।'' इस प्रकार सभी ने उसकी बढ़-चढ़कर प्रशंसा की। राजा ने प्रत्‍येक दरबारी को एक एक हीरा दिया। एक दरबारी चुपचाप बैठा था। राजा ने उससे भी वही प्रश्‍न किया। उसने उत्‍तर दिया, ''निस्‍संदेह आप एक अच्‍छे राजा हैं। लेकिन संसार में आपसे भी अच्‍छे बहुत से राजा हैं।'' यह सुनकर राजा बहुत प्रसन्‍न हुआ और उसे अपने पुत्र का अभिभावक बना दिया।   

5 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सच कहने का साहस ...अच्छी बात है..

SAJAN.AAWARA ने कहा…

DIL ME JO BAAT HO USE KAH DENA CHAHIYE. KUCH DER KE LIYE SACH GALAT LAGTA HAI LEKIN JINDGI BHAR KE LIYE TASLLI MILTI HAI. . . GOOD STORY. . . . . . JAI HIND JAI BHARAT

मानवी मौर्य ने कहा…

सत्‍य वचन।

संजय भास्कर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय भास्कर ने कहा…

आपने ब्लॉग पर आकार जो प्रोत्साहन दिया है उसके लिए आभारी हूं