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मंगलवार, 17 मई 2011

जानवर



प्रसिद्ध अंग्रेजी साहित्‍यकार हेक्‍टर हयूग मुनरो (18 December 1870 – 13 November 1916) जिनको 'साकी' के उपनाम से जाना जाता था, प्रसिद्ध अंग्रेजी कहानीकार थे। उनकी विनोदपूर्ण और कभी-कभी वीभत्‍स कहानियों में तत्‍कालीन एडवर्डियन समाज पर खूब व्‍यंग्‍य देखने को मिलते हैं। कहानी वि‍धा में उनकी तुलना ओ0 हेनरी और डोरोथी पार्कर से की जाती है। उनकी कहानियों में स्‍पष्‍टता से रचे गये चरित्र और सूक्ष्‍म वर्णन देखने को मिलते हैं। 'The Open Window' उनकी सर्वश्रेष्‍ठ कहानी मानी जाती है। प्रस्‍तुत है उनकी एक रोचक कहानी 'The Bull' का हिन्‍दी अनुवाद-

टॉम यॉर्कफील्‍ड शुरू से ही अपने सौतेले भाई लॉरेन्‍स से घृणा करता था और बरसों बीतते-बीतते इस घ़ृणा ने कुछ नम्र होकर उपेक्षा की एक सहनीय भावना का रूप ले लिया था। उससे घ़ृणा करने का कोई दृष्टिगत कारण नहीं था,उससे केवल खून का रिश्‍ता था,उसका कोई शौक या रुचि टॉम के साथ मेल नहीं खाती थी और साथ ही अभी तक उसके साथ टॉम के किसी तरह के झगड़े की नौबत भी नहीं आई थी। लॉरेन्‍स ने अपनी जिन्‍दगी की शुरुआत में ही फॉर्म छोड़ दिया था, और अपनी मॉं के द्वारा छोड़ी गयी छोटी सी रकम पर कुछ सालों तक अपना गुजारा करता रहा। उसने चित्रकारी को व्‍यवसाय के रूप में अपना लिया और ऐसा बताया जाने लगा कि वह इसमें अच्‍छा कमा लेता है, कम से कम इतना अच्‍छा कि उसका गुजारा चल सके। उसने जानवरों की चित्रकारी में विशेषज्ञता प्राप्‍त की, और उसे अपने चित्रों के लिए कुछ खरीदार पाने में भी सफलता मिल गयी। टॉम को अपने भाई की तुलना में स्‍वयं की एक सुनिश्चित श्रेष्‍ठता की सुखदायी अनुभूति होती थी: लॉरेन्‍स एक मामूली कलाकार था, उससे ज्‍यादा कुछ नहीं, हालॉंकि उसे अगर जानवरों का चित्रकार कहकर बुलाया जाता तो वह कुछ ज्‍यादा प्रभावशाली लगता था। टॉम एक किसान था, बहुत बड़ा किसान नहीं, मगर हेल्‍सरी फॉर्म उसके परिवार के पास कुछ पीढि़यों से था, और अपनी अच्‍छी पैदावार के लिए मशहूर था। टाम के पास जो थोड़ी-बहुत पूँजी थी, उससे उसने अपने पशुधन को संभालने और बढ़ाने की पूरी कोशिश की, और उसने क्‍लोवर फेयरी नाम के एक बैल को पाल रखा था, ऐसा बैल उसके आसपास के पड़ोसियों में किसी के पास नहीं था। इसने भले ही किसी पशुओं की प्रतियोगिता के मैदान में कोई हलचल न मचाई हो, मगर यह एक ताकतवर,सुडौल और हृष्‍ट-पुष्‍ट जानवर था जो एक छोटे किसान के पास हो सकता था। बाजार के दिनों में किंग्‍स हेड में क्‍लोवर फेयरी की बड़ी चर्चा रहती थी, और यॉर्कफील्‍ड कहा करता था कि वह सौ पौण्‍ड के बदले में भी क्‍लोवर फेयरी को अपने से अलग नहीं करेगा। छोटे खेती के व्‍यवसाय में यह एक बड़ी रकम होती हे और अस्‍सी पौण्‍ड के ऊपर कोई भी रकम टॉम को लालच देने के लिए काफी थी। 


अपने फार्म पर लॉरेन्‍स के दुर्लभ आगमन के मौके का बड़ी खुशी के साथ पूरा फायदा उठाते हुए टॉम उसे उस बाड़े को दिखाने ले गया जहॉं क्‍लोवर फेयरी अकेला था - चारागाह रूपी हरम में एक विधुर की तरह। टॉम को अपने भाई के प्रति अपनी घृणा पुनर्जीवित होती हुई महसूस हुई, उसे वह कलाकार अपने तौर-तरीके में और भी सुस्‍त, अपनी वेशभूषा में और भी बेढंगा, और अपनी बातचीत में कुछ क़ृपा दिखाते हुए विनम्र सुर मिलाता हुआ प्रतीत हो रहा था। उसने आलू की शानदार पैदावार पर कोई ध्‍यान नहीं दिया, बल्कि फाटक के पास एक कोने में पड़े पीले फूलों वाले खर-पतवार के प्रति ज्‍यादा उत्‍साह दिखाया, जो उस भली प्रकार निराई किये गये फॉर्म के मालिक के लिए अपमानजनक था। फिर जब वह काले मुँह वाले मेमनों के झुण्‍ड, जो शायद अपनी ओर ध्‍यान खींचने के लिये ही शोर मचा रहा था, की ओर देखकर उनकी तारीफ कर सकता था, उसने सामने की पहाड़ी पर बलूत के गुल्‍मों की लहलहाती पत्तियों की तारीफ करना शुरू कर दिया। लेकिन अब उस चीज का निरीक्षण करने के लिए ले जाया जा रहा था, जो हेल्‍सरी फॉर्म की शान थी: भले ही उसकी तारीफ के पीछे उसकी कुढ़न हो, भले ही वह बधाइयां देने में कंजूसी दिखा रहा हो, मगर उस दुर्दम्‍य पशु की श्रेष्‍ठता को उसे देखना और मानना ही पड़ेगा। कुछ सप्‍ताह पहले, किसी व्‍यावसायिक कार्य से टान्‍टन की यात्रा के दौरान टॉम को अपने सौतेले भाई की ओर से उस शहर के स्‍टूडियो में आने का निमन्‍त्रण मिला था, जहां लॉरेन्‍स अपने एक चित्र की प्रदर्शनी लगाने जा रहा था- एक बड़े कैनवस पर घुटनों तक गहरी दलदली जमीन में खड़े हुए एक बैल का चित्र - बेशक यह अपने आपमें एक अच्‍छा चित्र था, और लॉरेन्‍स इस पर बहुत मुग्‍ध था, ''मेरी बनाई हुई अब तक की सर्वोत्‍तम क़ति'' उसने बार-बार कहा था, और टॉम ने दरियादिली से कहा था कि यह वाकई में एक सजीव चित्र है। लेकिन अब उस रंगसाज को एक सजीव चीज दिखाई जाने वाली थी, सौन्‍दर्य और शक्ति का जीता जागता सबूत, ऐसी चीज जिस पर नजरें ठहर जायें, ऐसी तस्‍वीर जो एक फ्रेम की चार दीवारों के बीच एक ही अपरिवर्तित मुद्रा में खड़े रहने के बजाय हर बदलते पल के साथ नई भंगिमा और व्‍यवहार दर्शा सकती थी। टॉम ने लकड़ी का एक मजबूत दरवाजा खोला भूसा बिछे हुए एक यार्ड में ले गया।


''क्‍या यह शान्‍त रहता है'' कलाकार ने पूछा, ज्‍यों कि वह बैल कुछ सूँघता हुआ सा उनकी ओर बढ़ा।


''यह कभी कभी उछल-कूद मचाता है'' कहकर टॉम ने अपने सौतेले भाई को यह कयास लगाने के लिए छोड़ दिया कि क्‍या यह बैल 'अगर पकड़ सको तो पकड़ो' जैसा खेल तो नहीं खेलता है। लॉरेन्‍स ने बैल के कद पर एक-दो बेपरवाह टिप्‍पणियां कीं और उसकी उम्र वगैरह को लेकर एक-आध सवाल किये। और फिर बडे इत्‍मीनान से उसने बातचीत का रुख दूसरी ओर मोड़ दिया। 


''तुम्‍हें वह तस्‍वीर याद है जो मैनें तुम्‍हें टान्‍टन में दिखाई थी?'' उसने पूछा। 


''हॉं, टॉम ने रोष में कहा, ''दलदल में खड़ा हुआ एक सफेद मुँह वाला बैल। मुझे हियरफोर्ड नस्‍ल वाले ऐसे बैल पसंद नहीं हैं: थुलथुल दिखने वाले जंगली जानवर, मानों उनमें जान ही न हो। इसलिए उनका चित्र बनाना आसान होता है। यह गबरू जवान तो एक जगह रुकता ही नहीं, है न फेयरी?'' 


''मैनें वह तस्‍वीर बेच दी है'', लॉरेन्‍स ने आत्‍म-सन्‍तुष्टि से परिपूर्ण आवाज में बताया। 


''बेच दी'' टॉम ने कहा, ''सुनकर खुशी हुई। उम्‍मीद करता हूँ तुम्‍हें इसकी अच्‍छी कीमत मिली होगी।'' 


''मुझे इसके लिए 300 पौण्‍ड मिले।'' लॉरेन्‍स ने कहा। 


टॉम ने चेहरे पर क्रोध के भाव लाते हुए उसकी ओर देखा। तीन सौ पौण्‍ड। अच्‍छे से अच्‍छे बाजार मूल्‍य होने पर भी उसे अपने क्‍लोवर फेयरी के बदले 100 पौण्‍ड से ज्‍यादा न मिलते, और उधर उसके सौतेले भाई को एक वार्निश किये हुए कैनवस के टुकड़े को रंगने के लिए इससे तीन गुना धन मिल गया था। इस कटु अपमान का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा था क्‍योंकि इसने क़ृपा दिखाने वाले विनीत और आत्‍म-सन्‍तुष्‍ट लॉरेन्‍स की विजय की प्रबल घोषणा कर दी थी। युवा किसान ने सोचा था कि वह अपनी सबसे कीमती चीज दिखाकर अपने सौतेले भाई के होश उड़ा देगा, लेकिन अब पासा पलट गया था, एक तस्‍वीर की भारी कीमत के सामने उसका कीमती जानवर तुच्‍छ और महत्‍वहीन हो गया था। यह तो बहुत ही अन्‍यायपूर्ण था। एक तस्‍वीर नकली जीवन की कुशल क़ृति से अधिक कुछ नहीं हो सकती थी, जबकि क्‍लोवर फेयरी जीती जागती चीज था, अपनी छोटी सी दुनिया का बादशाह, अपने गॉंव की एक शख्सियत। अपनी मृत्‍यु के पश्‍चात भी वह शख्सियत बरकरार रहने वाली थी, उसकी संतानें घाटी के चरागाहों और पहाडी के किनारे घास के मैदानों पर विचरण करेंगी, गौशालाएं उनसे खचाखच भरी रहेंगी, वे मैदानों में और बाजार के स्‍थानों में अपने लाल रंग से रंगीन धब्‍बों की भांति दिखाई पड़ेंगे,  किसी भी अच्‍छी बछिया या सुडौल बछड़े को देखकर लोग कहेंगे, ‘’वाह, यह पुराने क्‍लोवर फेयरी के खानदान का है।‘’ उस समय तस्‍वीर केवल टंगी रहेगी, बेजान और अपरिवर्तित, धूल और वार्निश के नीचे छिपी हुई, ऐसी चल सम्‍पत्ति जिसे जो किसी मुसीबत के समय बिल्‍कुल निरर्थक साबित होगी। 



‘’कुछ कमजोर दिमाग वाले मूर्ख लोग ही एक चित्र पर तीन सौ पौण्‍ड बरबाद करते होंगे; कुछ कह नहीं सकता, क्‍योंकि ऐसे लोगों की रुचि से मैं ईर्ष्‍या करता हूँ। मैं तो तस्‍वीर के बजाय असली चीज रखना अधिक पसंद करूँगा।‘' 


उसने उस जवान बैल की तरफ सिर हिलाकर इशारा किया, जो बारी-बारी से उनकी ओर घूरते हुए अपने नथुने को ऊपर उठाकर और फिर अपने सींगों को नीचे करके कुछ खेल और कुछ अधीरता के साथ सिर हिला रहा था।


लॉरेन्‍स ने चिढ़ाने वाले आनन्‍दपूर्ण तरीके से ठहाका लगाया। 


‘’मुझे नहीं लगता कि मेरी तस्‍वीर के खरीदार को यह चिंता करने की जरूरत है कि उसने अपना पैसा बरबाद कर दिया है, जैसा कि तुम कहते हो। जैसे-जैसे मैं और मशहूर होता जाऊँगा, मेरी तस्‍वीरों की कीमत बढ़ती जायेगी। आज से पांच या छह साल बाद किसी बिक्रीकक्ष में लगाने पर उस तस्‍वीर के शायद चार सौ पौण्‍ड मिलेंगे। तस्‍वीरों में निवेश करना बुरा नहीं है, अगर आपको सही व्‍यक्तियों की कृतियों को चुनने की जानकारी हो। अब तुम यह कह नहीं कह सकते कि जितने अधिक समय तक तुम उस बैल को अपने पास रखोगे, उसकी कीमत बढ़ती जायेगी। उसका महत्‍व कुछ ही समय के लिए है, और यदि तुम उसे अपने पास रखे रहोगे, उसके चमड़े के लिए तुम्‍हें केवल कुछ शिलिंग ही मिलेंगे, जबकि एक समय मेरे बैल की तस्‍वीर किसी खास चित्र वीथिका के लिए एक बड़ी रकम देकर खरीदी जा रही होगी।‘’


अब कुछ ज्‍यादा ही हो गया था। सत्‍य, निन्‍दा और अपमान की संयुक्‍त शक्ति ने टॉम यार्कफील्ड की संयम शक्ति पर कुछ ज्‍यादा ही दबाव डाल दिया था। उसने अपने दाहिने हाथ में बलूत की छड़ी ले रखी थी, अपने बायें हाथ से उसने लॉरेन्‍स की कैनरी रंग की रेशमी शर्ट का कॉलर पकड़ लिया। लॉरेन्‍स एक लड़ाकू आदमी नहीं था, शारीरिक हिंसा के भय से वह  उसी प्रकार अपना संतुलन खो‍  बैठा जैसे गुस्‍से के कारण टॉम ने अपना संतुलन खो दिया था, और तभी ऐसा हुआ कि क्‍लोवर फेयरी उस अभूतपूर्व दृश्‍य को देखकर आनन्दित हो उठा जब एक मनुष्‍य बाड़े के पार गिरते हुए चीख रहा था, जैसे कोई मुर्गी किसी नांद में अपना घोंसला बनाने की लगातार कोशिश करते हुए चीखती है। अगले ही आनन्‍दपूर्ण क्षण में, उस बैल ने लॉरेन्‍स को अपने बायें कंधे के ऊपर उछाल दिया, और उसके हवा में उछलने के दौरान ही उसकी पसलियों में सींग घुसाने की, और जब वह जमीन पर गिरा तो घुटनों के बल उस पर सवार हो गया। यह तो केवल टॉम का बलपूर्वक हस्‍तक्षेप ही था कि वह अपने कार्यक्रम का आखिरी हिस्‍सा छोड़ने के लिए राजी हुआ। 


टॉम ने पूरे समर्पण से और बिना किसी ईर्ष्‍याभाव के अपने सौतेले भाई का उपचार कर उसकी उन चोटों से पूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य लाभ कराया, जो अधिक गम्‍भीर नहीं थीं- केवल एक कंधे की खिसकी हड्डी, एक दो टूटी पसलियां, और स्‍नायुतंत्र की विफलता। आखिरकार, उस युवा किसान के दिमाग में अब घृणा का कोई अवसर नहीं रह गया था। लॉरेन्‍स का बैल वाला चित्र भले ही तीन सौ में बिका हो या छह सौ में, और भले ही किसी बड़ी चित्र वीथिका में उसकी तारीफ हजारों लोगों द्वारा की गई हो, लेकिन यह किसी आदमी को अपने कंधे के ऊपर उछाल नहीं सकता और उसके दूसरी ओर गिरने से पहले ही उसकी पसली में चोट नहीं कर सकता। यह क्‍लोवर फेयरी की उल्‍लेखनीय उपलब्धि थी, जो उससे छीनी नहीं जा सकती थी। 


लॉरेन्‍स अब भी जानवरों के चित्रकार के रूप में प्रसिद्ध है,लेकिन अब उसकी विषयवस्‍तु हमेशा बिल्ली के बच्‍चे, हिरन के बच्‍चे या मेमने होते हैं – बैल कभी नहीं। 

6 टिप्‍पणियां:

Bhuvneshwar ने कहा…

अच्‍छी कहानी। मुनरो की कहानी 'द ओपन विन्‍डो' तो मैनें पढ़ रखी थी पर इस कहानी को पहली बार पढ़ा। कहानी को हिन्‍दी में पढ़वाने के लिए धन्‍यवाद।

Director ने कहा…

good story. I have read a number of Munro's short stories and I like his style. You have done justice with his story during trnslation into Hindi.

Coral ने कहा…

हयूग मुनरो को जादा पढ़ने का मौका तो नहीं मिला लेकिन यहाँ परिचय और कहानी पढके इनको और पढ़ने की इच्छा है

SAJAN.AAWARA ने कहा…

Bahut achi story hai sir ji.. Aage bhi pdhate rahiyega
jai hind jai bharat

Hamarivani ने कहा…

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पहली बार पढ़ी, बहुत अच्छी है..