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शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

क्‍या राजनीतिक दलों और आतंकवादी संगठनों में कोई फर्क बचा है ?

एक बार फिर मुम्‍बई नगरी शर्मसार हुई, लोकतंत्र शर्मसार हुआ, और हमारे नेता तमाशा देखते रहे।  मुम्‍बई में जिस प्रकार महाराष्‍ट्र नवनिर्माण सेना के गुण्‍डों द्वारा उत्‍तर भारतीयों की पिटाई की गई, यह बिल्‍कुल वैसा ही है जैसे कश्‍मीर में तथाकथित मुस्लिम आतंकवादी संगठनों द्वारा हिन्‍दुओं की हत्‍या करना और उन्‍हें कश्‍मीर से बाहर खदेड़ने का प्रयास करना। वोट की राजनीति इस कदर हावी हो गई है कि राजन‍ीतिक दलों और नक्‍सली व आतंकवादी संगठनों में ज्‍यादा फर्क नहीं बचा है। आतंक चाहे धार्मिक भेदभाव पर आधारित हो, जातिभेद पर या क्षेत्रवाद पर, आतंक की ही श्रेणी में आता है और इसे किसी भी प्रकार से न्‍यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। यदि इसी प्रकार हर राज्‍य में कुकुरमुत्‍ते की तरह उग रहे क्षेत्रीय दल आतंकी संगठनों की तरह व्‍यवहार करने लगें तो देश का क्‍या होगा, इसकी कल्‍पना करके ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। भारत का संविधान भारत के हर नागरिक को भारत के किसी भी भाग में बसने एवं आजीविका कमाने की स्‍वतंत्रता देता है। यदि नागरिकों के इस मूल अधिकार का हनन नेताओं की गुण्‍डागीरी द्वारा किया जाये, तो भारत राष्‍ट्र की अवधारणा ही निर्बल पड़ जायेगी।

हालांकि महाराष्‍ट्र सरकार ने दोषियों के खिलाफ आवश्‍यक कार्यवाही करने का आश्‍वासन दिया है, लेकिन वोट के चक्‍कर में कुछ भी कर गुजरने की होड़ में लगे राजनीतिक दलों की मानसिकता को देखते हुए यह आशा करना व्‍यर्थ है कि अपराधियों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई होगी, भले ही सरकार किसी भी दल की हो। अपराधियों को ऐसा दण्‍ड दिया जाना चाहिए कि वे दुबारा वही अपराध करने से पहले सौ बार सोचें। लेकिन महाराष्‍ट्र में तो प्रत्‍यक्ष और परोक्ष रूप से इस बात को बढ़ावा दिया जा रहा है कि उत्‍तर भारतीयों को वहां से खदेड़ा जाये। यह सब केवल वोट की गन्‍दी राजनीति के लिए हो रहा है। शर्मनाक बात यह है कि कुछ बुद्धिजीवी, मीडिया का एक तबका और यहां तक कि फिल्‍म उद्योग में भी कुछ लोग इस आतंक एवं क्षेत्रवाद की तुच्‍छ राजनीति का समर्थन करते नजर आ रहे हैं। 

एक बात तो तय है कि आज के राजनीतिक परिदृश्‍य को देखते हुए यह स्‍पष्‍ट हो गया है कि राजनीति करने के लिए किसी क्‍वालिफिकेशन की जरूरत नहीं, बस गुण्‍डागर्दी आनी चाहिए और उस गुण्‍डागर्दी को जायज ठहराने का कोई वोट-जिताऊ कारण मिल जाये तो फिर  कहना ही क्‍या ?

10 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार झा ने कहा…

पिछले कुछ समय में जिस तरह से दिल्ली मुंबई जैसे क्षेत्रों ,नगरों में क्षेत्रीयता को बढावा दिया जा रहा खासकर के उत्तर भारतीयों और उनमें भी विशेषकर बिहार उत्तरप्रदेश से आए लोगों के साथ वह दुखद और चिंताजनक है । इससे अधिक शर्मनाक है इन मुद्दों पर सरकार का उदासीन रवैय्या । और आस्ट्रेलिया में जब कोई भारतीय इसका शिकार होता है तो फ़िर पूरी दुनिया में इसका हल्ला मचाया जाता है । घर का होश नहीं बाहर का शोर । दुखद और अफ़सोसजनक

बेनामी ने कहा…

अब वो नया नवेला गांधी अन्ना कहाँ सो रहा है?
क्या उसको कुछ दिखायी सुनाई नही दे रहा है.
अब क्यो नही देश की एकता के लिये अनशन करता है.
उस रंगे सियार अन्ना की यही असलियत है
वो पहले भी राज ठाकरे की गुंडागर्दी का समर्थन कर चुका है.
और अब इस विषय पर जानबूझ कर मौन धारण किये हुये है.
अब उत्तर भारतीयो को भी चुप नही रहना चाहिये.
उत्तर भारत मे रह रहे मराठियो को पटक पटक कर मारना चाहिये. और दिखा देना चाहिये की असली गुंडागर्दी क्या होती है
बहुत हो गया तमाशा.

बेनामी ने कहा…

सब मराठी साले कमीने है
I HATE MARATHI

घनश्याम मौर्य ने कहा…

अजय जी, आपकी बात से सहमत हूँ। अन्‍ना जी भ्रष्‍टाचार के केवल आर्थिक पक्ष को लेकर चले हैं,जो अपनी जगह ठीक है, लेकिन पर्याप्‍त नहीं। दूसरी बात, उनके तथा ऐसे ही अन्‍य समाज सुधारकों और विचारकों का ऐसे मुददे पर चुप रहना समझ से परे है।

बेनामी ने कहा…

धनश्याम जी
अन्ना राज ठाकरे की इस उत्तर भारतीय नीति का समर्थन पहले ही कर चुका है.
गूगल पे अन्ना राज ठाकरे लिखकर सर्च कर लीजिये.
इस बार इसलिये मौन है.
क्यो कि राज ठाकरे का झूठा विरोध वो कर नही पा रहा है
और अगर सच कह देगा तो उसका रंग उतर जायेगा.

SAJAN.AAWARA ने कहा…

na jane ye desh kab sudhrega,,,
jai hind jai bharat

ek uttar bhartiya living in mumbai ने कहा…

lekin is baat ko sweekar karna hoga ki ham log hi jaakar vyvastha ko bigadne ka kaam bhi karte hain. gujrati log ab kis drishti se up bihar walon ko dekhne lage hain inhi harkaton ke kaaran..

बेनामी ने कहा…

@EK UTTAR BHARTIYA
भाई उत्तर भारतीयो ने तो अभी व्यवस्था बिगाड़ना शुरु ही नही किया है.

लेकिन अगर इस कमीने राज ठाकरे का
कमीनापन ऐसे ही जारी रहा
तो फिर इसको समझ मे आ जायेगा कि गुन्डागर्दी क्या होती है.
उत्तर भारत मे भी बहुत मराठी रहते है.
एक बिहार के राहुल राज ने मुंबई हिला दी थी.
ऐसे करोड़ो राहुल राज है.
और अगर ये राज ठाकरे नही सुधरा तो फिर जो व्यवस्था बिगड़ेगी.
फिर सुधारे नही सुधरेगी.

mahendra verma ने कहा…

सही कहा आपने, राजनीति करने के लिए सिर्फ गुंडागर्दी आनी चाहिए।

अनूप शुक्ल ने कहा…

सही है। बिरले राजनीतिज्ञ ही होंगे जो बिना गुंडई के राजनीति में हों!