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गुरुवार, 23 अगस्त 2012

किस किस को अपडेट करूँ - Blogger, Google+, FB, Orkut, Twitter, LinkedIn

उफ ये सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटें - Blogger, Google+, FB, Twitter, LinkedIn और न जाने कितनी वेबसाइटों पर लॉगइन आईडी लोगों ने बना रखे हैं। मैं तो केवल ब्‍लॉगर का मारा था, पर क्‍या करूँ कुछ तो पीयर प्रेशर और कुछ इस बात का डर कि लोग मुझे आई0टी0 क्रान्ति के इस जमाने में फिसड्डी न समझ लें, इसलिए कई और सोशल साइटों पर आईडी बनानी पडी। कुछ का तो पासवर्ड भी भूल चुका हूँ। सबसे पहले ब्‍लॉग बनाया। पर सभी लोग ब्‍लॉग नहीं पढ़ते। ब्‍लॉग के बाहर भी सोशल सर्किल होता है यह तब पता चला जब मेरे ऑफिस के सहकर्मी और यार दोस्‍त पूछने लगे, यार फेसबुक पर नहीं हो क्‍या?  झख मारकर फेसबुक पर आईडी बनानी पडी। इस तरह न जाने किन-किन सोशल साइटों पर अपना पंजीकरण्‍ा कराया। लेकिन जनाब, केवल नाम दर्ज कराने से कुछ नहीं होता। खाता चलाते भी रहना पड़ता है। और इसमें मदद करते हैं आपके सोशल सर्किल के लोग। कुछ दिन अन्‍तरजाल से गायब हुए नहीं कि तरह तरह के सवाल, यहां तक कि फोन भी आने लगते हैं, 'यार फेसबुक पर कई दिन से आये नहीं। आजकल ऑफिस में ज्‍यादा काम है क्‍या। इतना भी टाइम नहीं कि एक ट्वीट ही कर सको। ये भी कोई लाइफ है।' यानी वे सच्‍चे सामाजिक प्राणी का धर्म निभाते हुए आपको दूसरों के खाते का अपडेट देने के साथ ही आपको भी अपने खाते अपडेट रखने की याद दिलाते करते रहते हैं। यानी अगर आप इन्‍टरनेट पर मौजूद नहीं हैं, तो आप सामाजिक प्राणी नहीं हैं। 

जो लोग मेरी बातों को हल्‍के में ले रहे हैं, वे सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों के महत्‍व को नहीं जानते, नहीं जानते कि ये सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटें क्‍या बला हैं। पिछले कुछ सालों में दुनिया के कई देशों में जो तख्‍ता पलट हुए हैं, सरकारें बदली हैं, वह इन्‍हीं सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों की ही देन है। दुनिया भर की सरकारों की नाक में इन्‍होंने दम कर रखा है। अपने देश में ही हालिया घटी कुछ घटनाओं के पीछे भी इनका हाथ बताया जा रहा है। हमारी सरकार तो इन पर नकेल डालने की तैयारी में है।

खैर, मैं तो बात कर रहा था कि इतने सारे खाते खोल लेना तो आसान है पर चलाना बहुत मुश्किल। अब देखिये न, अपने ही ब्‍लॉग पर कितने दिन बाद वापस आ रहा हूँ मैं। वो भी यार दोस्‍तों द्वारा धकेल कर भेजा गया हूँ कि यार तुमने बहुत दिनों से कुछ पोस्‍ट नहीं किया। कुछ तो लिखो। ब्‍लॉगिंग की कुछ तो इज्‍जत रखो। बस मुझे अपनी पोस्‍ट के लिये मसाला मिल गया और यह पोस्‍ट आपके सामने है। 

5 टिप्‍पणियां:

Shah Nawaz ने कहा…

Baat to bilkul sahi hai aapki... Itni vyastta ke beech saari social sites per update rehna sahi mei'n mushkil hai....

kshama ने कहा…

Mai to ek ko bhi update nahee karti!

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

आपकी बात खूब समझ रहे ....इसीलिए इन सबमें इतना भी डूबें हैं कि यह तथाकथित सामाजिकता बोझ लगने लगे....

राजेश सिंह ने कहा…

यानि देर हुई आने में लेकिन शुक्र है फिर भी आये तो

ZEAL ने कहा…

It's really tough to manage so many sites. I am active on facebook and blogger only. Rarely I use Twitter.