मेरी बात:


आयो कहॉं से घनश्‍याम

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शनिवार, 20 अक्तूबर 2012

मॉं

सुबह स्‍नान कर पूजा करती,
सुरभित कस्‍तूरी है मॉं।

चपल रसोईं में घुस जाती,
बेलन, चमच, छुरी है मॉं।

दादा-दादी, पापा, मेरी
सबकी कमजोरी है मॉं।

थपकी देकर मुझे सुलाती,
मीठी-सी लोरी है मॉं।

भांति-भांति त्‍योहार मनाती,
गीत, भजन, कजरी है मॉं।

पहिये-सा परिवार संभाले,
वह मजबूत धुरी है मॉं।
 

3 टिप्‍पणियां:

kshama ने कहा…

Dua kartee hun ki mazboot sahara anant kaal tak bana rahe!

mahendra verma ने कहा…

धरती का स्वर्ग - मां का आंचल।

Hitesh Rathi ने कहा…

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